दिखावटी
Monday, February 21, 2011
दिखावटी
Thursday, October 14, 2010
नादान नेता
यह कितना बड़ा आश्चर्य हैकि जो आदमी जिस देश से अन्न, हवा ,पानी पाता उसी देश का विरोध कर रहा है यह कार्य और कही नहीं कश्मीर में हो रहा है। यह कार्य वहां कि विद्रोही जनता कर रही हो तो एक बात है लेकिन जब समय समय अपने स्वार्थ के लिए जब वहां के सत्ता रूढ़ नेता अपने स्वार्थ से वशीभूत होकर अपने स्वार्थ के लिए उलुल जुलूल बातों को बोलने लगते, स्वार्थ पूर्ण बयान देने लगते हैं तो आश्चर्य होता है इसके साथ कभी दिखाते हैं कि देखो मै नई दिल्ली के कितना नजदीक हूँ इससे भी नादान वो नेता लगते है जो दिल्ली में बैठें हैं जो समय समय पर उनकी बातों को समझ नहीं पाते बल्कि उनकी बातों में फंसकर उनका समर्थन कर बैठते हैं उनके नेता गिरी पर आसूं बहाने का मन होता है।
Monday, December 21, 2009
Friday, May 1, 2009
Monday, March 16, 2009
सच्चा दोस्त
खरे और अच्छे दोस्त की क्या पहचान है यदि आप लोंगो के पास इसका जो भी सही उत्तर हो तो मुझे बताने की कृपा करे।
Saturday, December 6, 2008
विचार prawah २१ disambar
यह संसार भी एक अदभुत जगह है जहा लोग अपने नित नए - नए विचार देते रहते हैं। चाहे इसका महत्व आम जनता के लिए रखता हो या नही या फिर इससे आम जनता को फायदा हो या नही ऐसे ही विचार तमाम साधुसंतो के द्वारा मंच पर बैठ कर अपने शिष्यों और चेलों को दिया जाता है की यह संसार सब मोह माया है इससे मुक्ति पाने का उपाय हमें करना चाहिए और मुक्ति पाने का उपाय बताया जाता है सारी मोह माया का त्यागा चाहिए, मोह माया के त्याग का मतलब बताया जाता है की सारा धन, दौलत, घर परिवार छोंड कर ईश्वर की भक्ति की जावे इससे ईश्वर प्रसन होंगे और आप को इस संसार से मुक्ति देंगे और स्वर्ग में अपने पास स्थान देंगे और भी ब्यक्ति तमाम तरह के तर्क दिए करते तो क्या इसका मतलब यह हुआ की इश्वर यह देखते रहते है कि अमुख आदमी के पास ज्यादा धन दौलत है उसको दर्शन नही देना है और अमुख आदमी के पास धन दौलत नही है उसको ही दर्शन देना है उसको ही मुक्ति देना है। लेकिन देखने में यह मिलता है कि जिसके पास धन दौलत नही है उसको भी ईश्वर के दर्शन नही होते हैं चाहे वह कितना भी ईश्वर के पूजा पाठ में लीन हो बताने वाले संत यह क्यों नही बताते है कि जो यह फूलों में सुगंध दिख रहा है,सूरज का प्रकाश दिख रहा है, चंद्रमा की शीतल चादनी दिख रही है, नदी, झरने, समुद्र,अच्छे विचार और अच्छे काम में लगे सारे लोगों के रूप में ईश्वर हमें दर्शन दे रहा है और हमें प्रेरित कर रहा है कि मै तुमको अपना प्रतिरूप बनाकर ईस संसार में भेजा हूँ तुम अच्छे अच्छे काम करो इससे ही तुम्हारी मुक्ति है इसी में तुम्हारी भलाई है इसी में तुम्हारा कल्याण है इसके अलावे इसी में इस संसार का कल्याण है। इन बातों को बताने के बदले जो ब्यक्ति शीर्ष पर बैठें है जो ख़ुद को ज्ञानी समझते हैं वो ख़ुद ही इस संसार के लोगों के बीच ग़लत उपदेस देते हैं, अपने शिष्यों के बीच ग़लत ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं जो ब्यक्ति ग़लत ज्ञान का प्रकाश फैलता ग़लत उपदेशों को अपने शिष्यों के बीच देता हो वह क्या इस संसार का भला कर सकता है लेकिन इस संसार में उस ब्यक्ति की बाते ज्यादा प्रभावी हैं ज्यादा सुनी जाती हैं ज्यादा मानी जाती हैं जो मंच से बैठ कर टीवी पर ज्यादा से ज्यादा उपदेश दे सके ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच अपनी बातो को पहुंचा। क्या अपने दायित्वों से भागना इस संसार से मुक्ति पाना है यदि यह संसार से मुक्ति पाना है तो ऐसी विचार धारा को उखांड फेकना चाहिए। इस संसार में अच्छा से अच्छा काम और बुरा बुरा काम पैसे के बिना संपन्न नही किया जा सकता है। अगर यह बात इतनी ही सत्य है की मोह माया के त्याग से ईश्वर की प्राप्ति होतीहै तो इसे उदाहरण सहित इस संसार के सामने रखना चाहिए।इन ज्ञानी ब्यक्तियों के द्वारा जीन मध्यमो के द्वारा उपदेश दिया जा रहा वह भी किसी संसारी ब्यक्तियों के द्वारा ही बनाया गया है। न की अपने जिम्मदारी से भागे ब्यक्ति के द्वारा।उन उपदेशो से क्या फ़ायदा जो इस समाज का भला न कर पाए , जो पलायनवाद को सिखाये। ऐसे ज्ञानी ब्यक्तियों के चक्कर में पराने के बयाजे ब्यक्ति यदि इन्सान,दिन दुखिओं की सेवा में लगा रहे तो इश्वर को जल्द से जल्द प्राप्त कर सकता है अपेछा कृत की अपनी जिम्मेदारियों से भाग कर,जिम्मदारी से भागना कायरता के अलावे और कुछ भी नही है
विचार प्रवाह DECEMBER ६
जब भी कोई घटना या दुर्घटना हो जाती है तो उसको लेकर बहस का दौर सुरु हो जाता है जैसे मुंबई पर ही आतंकवादी हमला हो उसको लेकर आम जनता से लेकर बुधाजिवियो तक में लेकर यह बहस छिड़ है की हम भारतीयों की कैसी सुरक्षा बयाव्स्था है जो की आतंकवादियों के द्वारा बार बार भेद दिया जाता है जबकि अमेरिका में एक ही बार आतंकवादियों के द्वारा हमला किया गया और अमेरिका ने ऐसा अभेद्ब्यास्था किया की आतंकवादियों के द्वारा आज तक नही भेद पाया गया , शायद लोगो की यह बात सही हो किन्तु इस संबंधन में हमें यह बात सदैव यह यद् रखनी चाहिए की आप कितना भी अभेद सुरक्षा बना लेवे लेकिन हमला करने वाला सैदेव आप के ऊपर होता है वह तो सदैव हमला करने के फिराक में लगा रहता है इस लिए उसके सफलता की दर सदैव ऊपर बनी रहेगी इस लिए किसी भी देश को इस मुगालते में नही रहना चाहिए की हमारी सुरक्षा अभेद है अगर एक ब्यक्ति यह सोच ले की हमें मरना है तो फिर वह बहुत से बिखरे लोगो पर भरी है यहाँ पर मेरे कहने का आशय यह नही है की हमें अपनी सुरक्षा नही करनी चाहिए बल्कि सुरक्षा से अधिक आवश्यक आतंकवादियों के गढ़ पर हमला करना , उनके विचारधाराओं पर पर हमला बोलना , सारे विश्व को एक साथ इस मुद्दे पर सोचना होगा तभी इस समस्या से निजात पाया जा सकता है नही तो यह आज भारत की ,अमेरिका की समस्या है तो कल के दिन सारे विश्व की समस्या होगी ।यदि विश्व के देश आज नही सम्हले तो कल के दिन उनको इस समस्या से जूझने के लिए तैयार रहना ही होगा क्योंकि आतंकी यह सोचते हैं की जो हम लोग सोच रहे हैं वही सही है बाकि सारे लोगों के सोच ग़लत हैं ।
Friday, November 28, 2008
मंघरांत विचार
सुरेश भट्ट की गिनती बुद्धिजीवी लोगो में होती थी। जब भी कोई घटना या विशेष अवसर पंदाता था तो उनका सलाह अवस्य लिया जाता था। एक बार आतंकवादियों ने देश के एक बड़े शहर पर आतंकी धावा बोल दिया तो देश के बुद्धिजीवी अपने अपने सलाह टीवी पर देने लगे कोई कहता ये आतंकवादी भटके हुए नौजवान है , तो कोई कहता हमें यह विचार करना होगा की ये नौजवान क्यों भटक गए है इस पर हमें विचार करना होगा , इस तरह के तमाम विचार बुद्धिजीवी लोग दे रहे थे इन बातो को सुनते - खीझ चुके एक विचारक ने अपनी बात रखते हुए कहा कीचलिए में आप सभी की बातो का समरथन करता हूँ और एक विचार आप सभी के सामने रखता हूँ क्यों नही हम सभी लोग इस न्यूज़ रूम से निकल कर चले आतंकवादियों से बात करे और वो जितने लोगों को बंधक बनाये है उन लोगों को हम लोग मुक्त करवावे इतना सुनते ही सारे विचारक बगले झाकने लगे और कहने लगे की खन्ना साहब आप तो ऐसी बात कर रहे है जैसे किसी पागल हठी के सामने पर जाओ और उसको पुचकार कर मनायाजाये तभी खन्ना साहब ने अपने मन में भुनभुनाया की ये सारे विचारक कमरे मई बैठकर खूब अच्छे अच्छे विचार दे सकते हैं लेकिन जब समस्या का सामना करना हो तो पीछे हट जाते है , शायद किसी ने ठीक ही कहा है की भगवान ने जहाज बनया समुद्र पर करने के लिए, पुल बनाया नदी पर करने के लिए ,दीपक बनाया रौशनी के लिए लेकिन कोए ऐसी चीज नही बनी जिससे दुस्तो का दिल जीता जा सके।
Friday, August 15, 2008
अफ़सोस
इस संसार में कुछ व्यक्तियों कि आर्थिक स्थिति कितनी भी अच्छी क्यों न हों| वे कितने भी अच्छे पद और प्रतिष्ठित पद पर क्यों न कार्यरत हों वो अपने आमदनी का रोना सदैव रोते रहते हैं| ऐसे ही एक व्यक्ति थे| जिनका नाम था विमलेश, जिनको प्यार से लोग विल्लू बाबू कहा करते थे| वो कार्यरत थे सप्लाई विभाग रसद आपूर्ति विभाग में लिपिक पद पर जहाँ पर तनख्वाह के अलावा वैसे कि आमद बराबर बनी रहती थी| ऑफिस में सीट भी ऐसी मिली थी| जहाँ से अधिकतर आदमियों को गुजरना ही पड़ता था| कोई भी व्यक्ति जिस किसी भी समाज या आदमियों के संपर्क में रहता है उन्ही के विचारों से प्रभावित होता रहता हैं और उसी तरह के विचार उसके मन में चलने लगते हैं| और उसकी सारी गतिविधियां उन्ही विचारों के प्रभाव में होती रहती हैं| बिल्लू बाबू भी इससे अछूते नहीं थे| उनके ऑफिस का माहौल सुबह से लेकर शाम तक ऐसा ही था| जहाँ पर छोटे से लेकर बड़ा तक ऊपरी दस रुपयों कि जुगाड़ में लगा रहता था| बिल्लू बाबू के जीवन में भी आमदनी का श्रौत अच्छा होने के बावजूद छल कपट से बचत का जुगाड़ उनके दिमाग में सदैव ही चलता रहता था| ऐसे ही ऑफिस के बात व्यवहार में एक ऐसे आदमी से मुलाकात हुई, जिसने अपना काम करवाने के एवज में एक ऐसा प्रस्ताव दिया जो विल्लू बाबू को सोने पे सुहागा महसूस हुआ| बातों ही बातों में सहमति होने पर उन्होंने उस व्यक्ति से शाम को घर पर आकर कार्य करवाने के लिए बोला और फिर दूसरे दिन अपना आदेश ले लेवे| तय समय के अनुसार वह व्यक्ति शाम को उनके घर आया तथा अपनी काबलियत के अनुसार घर कि विद्युत् विरिंग में पता नहीं क्या उलटफेर किया कि एक कमरे में कोई भी लाईट, पंखा इत्यादि चलाने पर भी विद्युत् मीटर को जैसे सांप सूंघ गया हों वह हिलता डुलता ही नहीं था| तथा और कमरों का लोड पड़ने पर मीटर समान्य रूप से चलने लगता था| यह करिश्मा देखकर बिल्लू बाबू इतने प्रसन्न हुए कि जो आदेश उस व्यक्ति को कल देने के लिए बोल रखा था| वह आदेश तुंरत उस व्यक्ति को दिया और चाय पानी कराकर उस आदमी को विदा किया| अब तो जैसे लगता था कि बिल्लू बाबू और उनके परिवार वालों को उनके मन की सोची हुई मुराद पूरी हों गयी हों| अब तो घर के किसी भी विद्युत् उपकरण को चलाना हो उसका सम्बन्ध लाकर अक्षय श्रौत से कर देते थे, जहाँ से बिजली का जो चाहो उपयोग करो लेकिन उनित एक पैसे का भी नहीं उठेगा| इस तरह से यदि बिजली के उपकरण को एक घंटा चलाने की आवश्यकता हो तो वह उपकरण कार्य हो जाने के बाद भी उसी तरह से चलता रहता था| कार्य लेने का यह तरीका यदि बिजली बिल से छुटकारा दिलाया था| तो उपकरणों के ख़राब होने की रफ़्तार को बढाया था| अब जो मांग बिजली के बिल में जाया करता था| वह भाग अब बिजली के उपकरणों के मरम्मत करने तथा बल्ब इत्यादि की खरीददारी में खर्च होने लगा, लेकिन इसकी तरफ किसका ध्यान जा रहा था| इस तरह यदि बिजली के किसी उपकरण में कोई छोटी मोटी खराबी आ गयी तो पैसा बचाने के लिए उसे अपने हाथ से ही ठीक करने लगे कुछ बना कुछ नहीं बना| लेकिन काम चलता रहा| इसी तरह कार्य करते-करते इलैक्ट्रिक प्रेस में करंट (विद्युत्) आने लगा, लेकिन चूकि वह कार्य कर रहा था| तो उसको बनवाने की ही क्या जरूरत थी| परिवार के लोग उससे कपडा प्रेस करते तो बड़ा ही सतर्क होकर कपडा प्रेस करते लेकिन कहा गया है की दुष्ट आदमियों और ख़राब उपकरणों से कितना भी सतर्क होकर रहिये| लेकिन आपसे जरा सी भी चूक हुई कि वो वो आपको चपेट में लिए बिना नहीं छोडेंगे| यही घटना एक दिन उनके लड़के राजू के साथ हुई, वह एक दिन कपडे प्रेस कर रहा था| कि पता नही कैसे उसका हाथ प्रेस से छू गया और वह जब तक चिल्लाता और कोई कुछ समझ पाता और प्रेस का स्विच ऑफ करता| राजू की आवाज गायब हो चूकी थी| और वह निढाल होकर जमीन पर गिर चुका था| सारे घर में रोना पिटना पद गया, लोगों के मन में तरह-तरह के विचार आ रहे थे| बिल्लू बाबू की जिंदगी ही जैसे सूनी हो गयी थी| इसी राजू का जन्म कितनी मनोतियों के बाद तीन लड़कियों के बाद हुआ था| उनको महसूस होता था| कि राजू का हत्यारा काल के क्रूर नियति ने नहीं किया हैं| बल्कि उसका हत्यारा मैं स्वयं हूँ| अब उनकी जिंदगी में इस घटना पर अफ़सोस करने के अलावा कुछ शेष न बचा था|
Wednesday, July 23, 2008
फैशन शो (fashion शो)
टी.वी. पर आ रहा फैशन शो को छात्रावास के छात्र अपने-अपने तरीके से विश्लेषित कर रहे थे| जब मॉडल विभिन्न डिजाईन के कपड़े पहनकर उतरती थी तो, देखने वाले दर्शक आँखे फाड़कर पाता नहीं कपड़ो को देखते थे या उसे बनाने वाले कलाकार के सोच को देखते थे या फिर कुछ और देखते थे| ये बात तो वही जाने लेकिन छात्रावास के छात्रों कि सोच भी अजब निराली थी| कोई कहता देखो डिजाइनर ने दो पतले-पतले डोरी का कितना सही उपयोग किया है डोरी से हाथ और सिर डाला डोरी कंधे पर झूलने लगा| और पहनने वाली मॉडर्न स्टाइल के कपड़े को पहन कर तैयार हुई| तो दूसरे मॉडल पर एक और लड़के ने टिप्पणी किया कि देखो डिजाइनर ने इस महंगाई के ज़माने में किस तरह कपड़े का बचत किया है| तभी एक लड़के ने इस शर्ट का नाम शोर्ट शर्ट बताया तभी उसके बगल में खड़े एक लड़के ने उसका नाम अंग-उभारू शर्ट का नाम दिया| तभी एक मॉडल एक ऐसी पैंट पहनकर आई जिसकी पूरी फिटिंग इतनी टाइट थी कि जिसको पहनते समय कितनी मशक्कत करनी पड़ी होगी|यह वह मॉडल ही जानती होगी| पैंट घुटने के थोडा नीचे तक थी लेकिन वहां पर कुछ ढीली सी थी| तथा वहां पर एक झब्बरदार घेरा सा लगा था| वह घेरा कुत्ते के झब्बरदार पूँछ से बना लग रहा था| इसे देखकर उन लड़कों में से किसी ने चुटकी ली कि अरे है भाई कोई नामकरण कर्ता, इस ड्रेस का भी नामकरण करों| सारे लड़के चुप होकर किसी नाम के बारे में विचार कर ही रहे थे, कि तब तक देखते हैं कि कई मॉडल एक साथ अपने पुरुष जोडों के साथ रैंप पर इठलाकर, मचलकर ऐसे चल रही थी कि लगता था|जैसे कि वो कपड़ो के अलावे और भी कुछ दिखाना चाह रही हो| इन जोडो के साथ जो सबसे खास बात देखने में लग रही थी वो ये थी कि इनके साथ जितने पुरुष थे| इनके बदन कपड़ो से ढके थे, लेकिन जो इनके साथ महिला मॉडल थी वो अर्ध-नग्न कि तरह दिख रही थी| लगता था, डिजाइनर को इनके कपड़े बनाते समय कपड़ो कि कमी पद गई| थी| तभी इनके कपड़े शरीर उघाडू तथा बदन दिखाऊ कि तरह दिख रहे थे| इन कपड़ो को देखकर एक लड़के ने कमेन्ट किया कि सुपर शोर्ट ड्रेस तो दूसरे लड़के ने फिर का कसा अंगदर्सक और कामुक विचार सर्जक ड्रेस| तभी एक लड़का और बीच में बोल पड़ा कि ये कपडा अपने शहर में बिकने आ जाए तो पता नहीं कितने लोग पहनकर सड़को पर निकलेंगे| और अगर गलती से कोई इस बनावट के साथ पहन कर निकलकर गया तो शहर के कुत्ते इन्हें पागलों सरीखा समझकर शायद भौकने लग जाए| और शौह्दों कि तो बात ही न कहों उनकी तो चांदी हो जाते|
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